संबद्ध प्राइमरी में शिक्षक भर्ती में जेडी का अधिकार बहाल
शासन ने आठ दिन बाद जारी किया संशोधित शासनादेश
लखनऊ। सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में होने वाली भर्ती के नाम पर कब कौन का गुल खिला दिया जाए इसका भगवान ही मालिक है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने आठ दिन पहले यानी 20 अगस्त को शासनादेश जारी करते हुए संबद्ध प्राइमरी में शिक्षकों की भर्ती के बाद वेतन अनुमति की फाइल मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को भेजने की व्यवस्था समाप्त कर दिया था। इसी तरह अल्पसंख्यक इंटर कॉलेजों के लिए भी व्यवस्था दी गई। माध्यमिक शिक्षा विभाग के इस शासनादेश के बाद मंडलों में बनाए गए संयुक्त शिक्षा निदेशकों के पद का महत्व काफी कम हो गया था।
सूत्रों का कहना है कि अल्पसंख्यक और संबद्ध प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति में दखल खत्म होने के बाद से ही प्रदेशभर के मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक सक्रिय हो गए थे। इसके छह दिन बाद ही माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से संशोधित प्रस्ताव भेजा गया, जिसमें संबद्ध प्राइमरी में शिक्षकों की नियुक्ति में जेडी के दखल को बहाल करने की बात कही गई। इसके आधार पर शुक्रवार को संयुक्त सचिव माध्यमिक शिक्षा सीपी सिंह की ओर से संशोधित शासनादेश जारी किया गया। इसमें कहा गया है सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों के संबद्ध प्राइमरी में शिक्षकों व प्रध्यापकों की नियुक्ति के बाद वेतन अनुमति संबंधी फाइल पूर्व की भांति 19 दिसंबर 2000 को जारी शासनादेश के आधार पर गठित मंडलीय समिति को भेजी जाएगी।
मंडलीय समिति ऐसे प्रकरणों को अधिकतम तीन सप्ताह में प्रत्येक दशा में नियमानुसार निस्तारित करेगी। मंडलीय समिति इस अवधि में यदि इसे निस्तारित नहीं करती है, तो स्कूल का प्रबंधक माध्यमिक शिक्षा निदेशक को प्रत्यावेदन से सकता है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ऐसे मामलों में एक माह में नियमत: निस्तारित करते हुए आदेश जारी करेगा। अल्पसंख्यक इंटर कॉलेजों के बारे में भी संशोधन किया गया है। मसलन पद रिक्त होने के तीन माह के अंदर भर्ती का विज्ञापन स्कूल प्रबंधन को निकालना होगा। ऐसा न होने पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अनुमति के बाद ही रिक्त पदों पर भर्तियां की जा सकेंगी।
इससे यह साफ हो गया है कि कॉलेज प्रबंधन पदों को भरने के लिए अब अपने हिसाब से खेल नहीं कर पाएगी। रिक्त पदों पर भर्तियां अधिक दिनों तक लटकाने के चक्कर में उसे निदेशालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इसके साथ अल्पसंख्यक इंटर कॉलेजों में भर्ती संबंधी वेतन अनुमति के लिए फाइल मंडलीय समिति को नहीं भेजी जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि अल्पसंख्यक और संबद्ध प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति में दखल खत्म होने के बाद से ही प्रदेशभर के मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक सक्रिय हो गए थे। इसके छह दिन बाद ही माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से संशोधित प्रस्ताव भेजा गया, जिसमें संबद्ध प्राइमरी में शिक्षकों की नियुक्ति में जेडी के दखल को बहाल करने की बात कही गई। इसके आधार पर शुक्रवार को संयुक्त सचिव माध्यमिक शिक्षा सीपी सिंह की ओर से संशोधित शासनादेश जारी किया गया। इसमें कहा गया है सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों के संबद्ध प्राइमरी में शिक्षकों व प्रध्यापकों की नियुक्ति के बाद वेतन अनुमति संबंधी फाइल पूर्व की भांति 19 दिसंबर 2000 को जारी शासनादेश के आधार पर गठित मंडलीय समिति को भेजी जाएगी।
मंडलीय समिति ऐसे प्रकरणों को अधिकतम तीन सप्ताह में प्रत्येक दशा में नियमानुसार निस्तारित करेगी। मंडलीय समिति इस अवधि में यदि इसे निस्तारित नहीं करती है, तो स्कूल का प्रबंधक माध्यमिक शिक्षा निदेशक को प्रत्यावेदन से सकता है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ऐसे मामलों में एक माह में नियमत: निस्तारित करते हुए आदेश जारी करेगा। अल्पसंख्यक इंटर कॉलेजों के बारे में भी संशोधन किया गया है। मसलन पद रिक्त होने के तीन माह के अंदर भर्ती का विज्ञापन स्कूल प्रबंधन को निकालना होगा। ऐसा न होने पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अनुमति के बाद ही रिक्त पदों पर भर्तियां की जा सकेंगी।
इससे यह साफ हो गया है कि कॉलेज प्रबंधन पदों को भरने के लिए अब अपने हिसाब से खेल नहीं कर पाएगी। रिक्त पदों पर भर्तियां अधिक दिनों तक लटकाने के चक्कर में उसे निदेशालय के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इसके साथ अल्पसंख्यक इंटर कॉलेजों में भर्ती संबंधी वेतन अनुमति के लिए फाइल मंडलीय समिति को नहीं भेजी जाएगी।
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